जानिए विश्वकर्मा देव कौन है?

देव विश्वकर्मा कौन है?

चलिए जानते है देव विश्वकर्मा है कौन?

सबसे पहले भगवान विश्वकर्मा के महा पूजन विश्वकर्मा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं।


विश्वकर्मा महापुराण के अनुसार-

विश्वकर्मा महापुराण के अनुसार देव विश्वकर्मा शिल्पी कार कलाकार एवं सभी कलाओं के स्वामी हैं। सृस्टी में सभी निर्माण इनकी इच्छाओं पर होती है। विश्वकर्मा महापुराण के अनुसार इन्हें इन्हें समस्त चराचर जगत का निर्माण कर्ता या सृर्जन कर्ता बताया गया है। विश्वकर्मा महापुराण में है आदिश्वर के नाम से भी जाना जाता है।

ऋग्वेद एवं स्कंद पुराण के अनुसार- 


ऋग्वेद के अनुसार विश्वकर्मा विधाता ब्रह्मा के पुत्र धर्म के वास्तुदेव नामक से पुत्र उत्पन्न हुए हैं। स्कंद पुराण के अनुसार ब्रह्मा के पौत्र होने के नाते इनमें ब्रह्मा की तरह सृजन करने की कलाएं थी।

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ब्रह्मांड पुराण के अनुसार -


लिंग पुराण के अनुसार भगवान शिव के द्वारा भगवान ब्रह्मा को श्राप दे दिया जाता है कि आपकी पूजा समस्त चराचर जगत में कहीं नहीं होगी। 
वायु पुराण के अनुसार भगवान शिव ने श्राप से निस्तारण का उपाय बताएं।

बराह एवं मत्स्य पुराण के अनुसार - 

मत्स्य पुराण एवं विष्णु पुराण में ब्रह्मा के पांचवे सिर का खंडन एवं ब्रह्मा को दिए गए श्राप का वर्णन मिलता है। भगवान शिव एवं भगवान विष्णु दोनों द्वारा आपस में समाधान के विषय पर चर्चा कर उन्होंने श्राप का निस्तारण के रूप में यह निर्णय बताया कि श्राप को वापिस या रद्द नहीं किया जा सकता परंतु निस्तारण किया जा सकता है उन्होंने बताया कि आपकी इस ब्रह्मा स्वरुप की पूजा नहीं होंगी आपके दूसरे रूप की पूजा होगी।

ब्रह्मांड पुराण में भगवान ब्रह्मा के एक सृजनात्मक रूप विश्वकर्मा का वर्णन मिलता है। भगवान विश्वकर्मा भगवान ब्रह्मा के रूप होने के कारण उनके पास भगवान ब्रह्मा की तरह सृजन एवं रचना करने की समस्त शक्तियां थी पल भर में बड़ी से बड़ी रचनाएं कर सकते थे। 

महापुराण के अनुसार - देवी आदि शक्ति के द्वारा त्रिदेव की उत्पत्ति के पश्चात मुख्य कर्तव्य को दिया गया था उनको शस्त्र भी प्रदान किए गए थे भगवान शिव एवं भगवान विष्णु को तो शस्त्र दिए गए परंतु ब्रह्मा जी को नहीं दिए गए देवी ने बताया कि भगवान ब्रह्मा की रक्षा भगवान विष्णु करेंगे और वरदान दिया कि आप किसी की व्युत्पत्ति कर सकते हैं। भगवान ब्रह्मा के मस्तिष्क में ख्याल आया था कि अगर भगवान विष्णु ना रहे अथवा कहीं ना रहे तू मेरी रक्षा कौन करेगा इसीलिए उन्होंने इस बार अपने दूसरे रूप को शस्त्रहीनता से परे रखा और अपने लिए शस्त्र भी बनावाएं। 

पुराने एवं शास्त्रों में भगवान विश्वकर्मा के पाँच रूपों का वर्णन मिलता है।


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निर्माण 

विश्वकर्मा का अर्थ है विश्व की कर्मा अर्थात विश्व की रचना को आकार(कर्मा रुप)  देने वाले। ब्रह्मांड पुराण के अनुसार भगवान ब्रह्मा के  दूसरे रूप भगवान विश्वकर्मा है। भगवान शिव के बताए गए उपाय श्राप से निस्तारण के अनुसार इनकी पूजा भी होती है और ब्रह्मा की इच्छा के अनुसार अत्यंत शक्तिशाली
और यह सभी शास्त्रों को उत्पन्न करने में सक्षम थे और किए भी और ये किसी भी प्रकार की रचनाएं कर सकते थे भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र भगवान शिव के त्रिशूल भगवान ब्रह्मा का ब्रह्मास्त्र इंद्र के वज्रास्त्र अग्नि के अग्नि अस्त्र एवं सूर्य के सूर्य अस्त्र की भी उत्पत्ति की इसके अलावा इन्होंने कुबेर पुरी यम पुरी द्वारिका नगरी सुदामापुरी स्वर्ग लोक में बहुत सी रचनाएं और रावण की लंका तक की भी रचना की थी आदि ।

इनकी रचनाएं इनकी महिमा अनंत एवं अगणनिय है। 




यह भगवान विश्वकर्मा के कुछ जानकारियां रही एक बार पुनः विश्वकर्मा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं।


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