अहिर समुदाय (यादव कुल)
अहिर समुदाय एवं यादव कुल -»
नमस्कार दोस्तों, मैं आज 'यादव जाति' या 'अहिर' जाति के विषय में संपूर्ण जानकारी दुंगा।
तथ्य -»
• अहिर शब्द का अर्थ
• अहिर एवं यादव
• यादवकुल
• यादवकुल की उत्पत्ति
• यादवों का वर्ण
• यादवों का गोत्र
• यादव का परिचय
अहिर शब्द का अर्थ -»
अहीर भारत में एक पारंपरिक समुदाय है। अहीर शब्द संस्कृत के अभीर शब्द से लिया गया है। जिसका शाब्दिक अर्थ है, निडर (कभी न भयभीत होने वाला) या सबसे बहादुर अथवा महान। अहीर आधुनिक शब्द चरवाहा का समानार्थी शब्द है।
अहिर एवं यादव -»
अहिर की उत्पत्ति प्राचीन यादवों से हुइ है। अर्थात अहिर प्राचिन यादव है।
यादवकुल -»
यादवकुल, महाराजा यदु के कुल को यादवकुल कहते हैं।
भगवान श्री कृष्ण भी इसी कुल से है। इन्हें यदुवंशी भी कहते हैं।
यादवकुल की उत्पत्ति -»
यादवकुल की उत्पत्ति परमपिता भगवान ब्रह्माजी के पुत्र महाऋषि अत्रि मुनि से हुई है। हलांकि संसार के सभी जीव - जंतु एवं इंसान, पेड़ - पौधे, ग्रह-नक्षत्र तारे तक की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा से हुई है। इसलिए हम हमारे ग्रंथो में 'वसुधैव कुटुंबकम' श्लोक को देखते हैं।
महर्षि अत्रि मुनि से निम्न प्रकार यादव कुल की उत्पत्ति हुई है-
अत्रि मुनि -» चंद्रमा -» बुध -» पुरुरवा -» नहुष -» जजाति -» यदु -» यादवकुल या यदुवंशी
अत्रि - ब्रह्माजी के नौ ऋषि पुत्रों में से एक
चंद्रमा - चंद्रदेव माता अनुशुइया एवं अत्रि मुनी के पुत्र
बुध - बुद्धि के ग्रह चंद्रमा के पुत्र
नहुष - बुध के पुत्र, शिवपुत्री अशोकसुन्दरी के पति, देवराज नहुष
पुरुरवा - देवताओं के सहायक महाप्रतापी राजा, देवराज नहुष के पुत्र
ययाति - पुरुरवा के पुत्र, शुक्राचार्य के पुत्री देवयानी के पति
यदु - महाराजा जजाति के पुत्र एवं सबसे महान राजा जिनके नाम पर कुल का नाम यादव पड़ा और वे यदुवंशी कहलाए।
इसी कुल से कौरवों की भी उत्तपति हुई है।
ये चंद्रमा के वंशज है इसलिए इन्हें चंद्रवंशी भी कहा जाता है।
यादवों का वर्ण -»
कर्मों के अधार पर वर्ण चार प्रकार के होते हैं ब्राह्मण, क्षत्रिय, शुद्र एवं वैश्य।
यादव चंद्रवंशी क्षत्रिय हैं। अर्थात यादव की वर्ण व्यवस्था क्षत्रिय वर्ण व्यवस्था है।
यादवों का गोत्र -»
यादव की उत्पत्ति ब्रह्मा के पुत्र अत्री से हुई हैं अतः यादवों का गोत्र अत्रि है।
यह ध्यान रखें यादव का गोत्र कदापि कश्यप नहीं है। अतः गोत्र पूछे जाने पर अत्रि ही बताएं। क्योंकि कश्यप भी ब्रह्मा के ही पुत्र हैं और कश्यप से सूर्य देव मतलब सूर्यवंश उत्पन्न हुआ है अर्थात भगवान राम का कुल।
अत्री गोत्र भगवान कृष्ण का कुल है।
यादवों का परिचय -»
यादव (शाब्दिक रूप से, यदु के वंशज जिन्हें यदुवंशी या अहीर भी कहा जाता है) भारत और नेपाल का पारंपरिक रूप से योद्धा-पशुपालक समुदाय है। यादव शब्द को अक्सर अहीर के पर्याय के रूप में देखा जाता है, क्योंकि ये एक ही समुदाय के दो नाम हैं। ब्रिटिश जनगणना (1881) में यादवों की पहचान अहीरों के रूप में की गई थी।
अधिकांश आधुनिक यादव किसान हैं, जो मुख्य रूप से भूमि जोतने में लगे हैं, तथा एक तिहाई से भी कम जनसंख्या मवेशी पालने या दूध के व्यवसाय में लगी हुई है।
यादव हिन्दु धर्म के वैष्णव या भागवत मत के अनुयायी है।
दुनिया में सबसे पवित्र वंश के रूप में यदुवंश को माना जाता है। यह वंश महाराजा यदु के नाम पर है, जो चंद्रवंशी राजा थे। पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों में इस वंश का उल्लेख मिलता है, और इसे पवित्र और शुद्ध माना जाता है।
महाभारत में भाग ली नारायणी सेना यादव वीरों की सेना थी यह एक अपराजय सेना थी।
हिंदू ग्रंथों जैसे महाभारत, हरिवंश और पुराणों में यदु को राजा ययाति और उनकी रानी देवयानी के सबसे बड़े पुत्र के रूप में वर्णित किया गया है। यदु एक स्वाभिमानी व सुसंस्थापित शासक थे। विष्णु पुराण, भागवत पुराण व गरुड़ पुराण के अनुसार यदु के चार पुत्र थे, जबकि बाकी के पुराणो के अनुसार उनके पाँच पुत्र थे। बुध व ययाति के मध्य के सभी राजाओं को सोमवंशी या चंद्रवंशी कहा गया है। महाभारत व विष्णु पुराण के अनुसार यदु ने पिता ययाति को अपनी युवावस्था प्रदान करना स्वीकार नहीं किया था जिसके कारण ययाति ने यदु के किसी भी वंशज को अपने वंश व साम्राज्य मे शामिल न हो पाने का श्राप दिया था। इस कारण से यदु के वंशज सोमवंश से प्रथक हो गए व मात्र राजा पुरू के वंशज ही कालांतर में सोमवंशी कहे गए। और इसी कारण यदु के वंशज यदुवंशी कहलाए।
प्राचिन यादव, सस्त्र एवं शास्त्र दोनों विद्या रखते थे। इसलिए ये सबसे श्रेष्ठ थे। अर्थात श्रेष्ठ जाति एवं वंश के लोग है। परंतु आज के यादव ये सब भुल रहे हैं।
इनके कार्य लगभग सभी वर्णों का था। जैसे ये ज्ञान एवं दर्शन में ब्राह्मण जैसा, शासन एवं कार्यभार में क्षत्रिय और इनका बिरासत व्यवसाय दुध बेचना था अतः वैश्य।
इसलिए यादव सबसे श्रेष्ठ थे। बाद में जब जन्म के अधिकार पर व्यवस्था बनाई गई जो वर्ण व्यवस्था से बदलकर जाति व्यवस्था में चली गई जिसमें ब्राह्मण ने अपने आप को सबसे श्रेष्ठ बताया।
परंतु इस बात का विरोधाभास शास्त्रों में मिलता है इसमें युधिष्ठिर ने यक्ष से कहां है की जन्म से कोई ब्राह्मण नहीं होता केवल कर्म से होता है।
यादव अर्थात अहीर को अलग-अलग उपनाम से जाना जाता है।
जैसे -» ग्वाल, डरहोढ, राव, रावत, कमरिया, जाट, चौधरी, कृष्नोत, नंदवंशी, गोप, गोपाल, आदि कइ अन्य नाम।
भगवान श्री कृष्णा इनके कुल के भगवान है।
इनके कुल के देवता संत शिरोमणि श्री काशीदास बाबा है। जो कर्तव्य एवं त्याग के लिए प्रतीक है। यह इनकी पूजा प्रत्येक श्रावण मास के प्रथम मंगलवार में करते हैं। यह इनकी पूजा पशु-पक्षी रक्षा के लिए करते हैं।
आधुनिक भारत में 10वीं और 12वीं शताब्दी के अंदर यादव वंश का शासन काल रहा।
यादव स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आजादी तक अहम भूमिका निभाए। और आज भी आगे भूमिका निभा रहे हैं।
चुकी यादव का इतिहास बहुत बढ़ा इतिहास है इसे कुछ शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
पूरा पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।
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जय यादव जय माधव 🙏
Disclaimer -» सारी जानकारी इंटरनेट एवं धर्मग्रन्थों से ली गई है। इसका उद्देश्य मात्र यादवो को उनका परिचय बताना है न कि किसी को बड़ा या छोटा दिखाना नहीं है।
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