Pitra Paksh (पित्र पक्ष)
पित्र पक्ष में क्या करे.....
आइये पित्र पक्ष के विषय में जानकारी प्राप्त करते हैं।
• पित्र पक्ष क्या है?
• पित्र पक्ष किस के लिए है?
• तर्पण की विधि।
• वैदिक मत
• वैज्ञानिक मत
• सावधानियां एवं परहेज
पित्र पक्ष क्या है ?
पित्र पक्ष को पित्रों का पक्ष माना जाता है। यह अश्विनी मास में होता है। यह 15 दिनों का होता हो। इसमें अपने पुर्वजों को याद किया जाता है एवं पित्रों को जल, दुध आदि तर्पण किया जाता है।
पित्र पक्ष किस के लिए है ?
पित्र पक्ष पित्रों का पक्ष होता है। यह उनके लिए होता है जिनके पिता नहीं है। वे इसमें अपने पिता समेत शेष मृत पुर्वजों को तर्पण करते हैं। यह ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र सबके लिए है।
तर्पण की विधि
तर्पण के लिए दोपहर से कुछ पहले का समय सबसे सही होता है
1. स्नान करें:
सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
2. जनेऊ धारण करें:
जनेऊ को दाहिने कंधे पर धारण करें.
3. कुशा धारण करें:
दाहिने हाथ में कुशा की पवित्री धारण करें.
4. दिशा बदलें:
पहले पूर्व दिशा की ओर मुख करें, फिर उत्तर की ओर, और अंत में दक्षिण दिशा में मुख करके बैठें.
5. जल अर्पित करें:
दाहिने हाथ में कुशा और तिल लेकर बाएं हाथ में पकड़े गए पात्र से जल दक्षिण दिशा में छोड़ें.
6. मंत्रों का जाप करें:
जल अर्पित करते समय पितरों का नाम लेकर 'ॐ (पितर का नाम) गोत्राय नमः तर्पयामि' मंत्र का जाप करें.
7. प्रार्थना :
और अंत में ॐ पितृभ्यो नमः एवं भगवान नरायण का द्वादस अक्षर मंत्र ॐ भगवते वासुदेवाय नमः कहकर भगवान से पित्रों के शांति के लिए प्राथना करे।
तर्पण के तुरंत बाद बचे हुए जल को किसी वृक्ष के जड़ में डाले।
वैदिक मत
वैदिक मान्यता के अनुसार जिन पित्रों को उनके पृथ्वी पर संतानो या परिवारजनों द्वारा तर्पण किया जाता है उनके पित्रो को तृप्ती प्राप्त होती है एवं भटकती आत्माओं का मार्गदर्शन होता है। एवं उनकी यात्रा में सुगमता आती है।
वैज्ञानिक मत
वैज्ञानिक मान्यता उपरोक्त बातो का खण्डन करती है। परंतु वैज्ञानिक मत इस प्रक्रिया को बढावा देता है और बताता है कि इससे शारीरिक एवं मानसीक दोनों लाभ है।
धीमी पाचन क्रियाए तेज होती है। शरीर में सात्विकता
का विकास होता है। अपने पुर्वजों के याद, वादे एवं वचन तथा गुणों का प्रादुर्भाव होता है। मन को शांति की प्राप्ति होति है जिससे कई मानसीक एवं तनाव जैसे High BP, Dispersion इत्यादि कम होते हैं।
ब्रह्मचार्य का विकास होता है जो नवीन कार्यों करने की क्षमता मिलती है। इत्यादि वैज्ञानिक लाभ है।
सावधानियां एवं परहेज
इसमें निम्न सावधानियां या परहेज है
1. ब्रह्मचर्य का पालन करे
2. तामशिक पदार्थ जैसे मदिरा, मांस, प्याज, लहसुन, नेनुआ आदि का सेवन न करे।
3. शुद्ध शाकाहार का सेवन करे।
4. फलो का जरुर सेवन करे।
5. केवल दो बार ही भोजन करे।
6. भगवान का स्मरण करे और भागवत कथाओ को सुने या देखे।
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